छतरपुर(मोहम्मद साजिद)- 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस पर बक्सवाहा की समृद्ध जंगल को बचाने देश के कई हिस्सों के पर्यावरण प्रेमी व स्थानीय लोगों ने मिलकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये। पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार सुबह 10 से लेकर शाम 5 बजे तक एक दिवसीय उपवास सत्याग्रह कार्यक्रम को प्रशासन ने कोरोना गाईड लाईन का हवाला देते हुए किसी भी तरह के आयोजन पर पूर्ण प्रतिबंध की बात कह नहीं करने दिया। इसके बाबजूत दिल्ली से आये भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व सहायक महानिर्देशक डॉ सदाचारी सिंह तोमर, भारतीय किसान यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष ईश्वर चंद त्रिपाठी, भोपाल से आये पर्यावरण बचाओ अभियान के संस्थापक शरद सिंह कुमरे, स्थानीय अमित भटनागर, दिलीप शर्मा, आशिक मंसूरी, सोना आदिवासी, बृजेश शर्मा, सुमित यादव आदि सभी सत्याग्रहियों ने उपवास जारी रखते हुए, जगारा, निवानी, वीरमपुर आदि खनन प्रभावित ग्रामों का भ्रमण किया व प्रभावित ग्रामीणों से चर्चा की, नन्द राम आदिवासी, भीकम सिंह ने जंगल को जीवन बताते हुए जंगल काटने का विरोध जताया। दिलीप शर्मा ने बताया कि प्रभावित गांव में ज्यादातर लोग जंगल बचाने के पक्ष में है तो कुछ लोग जंगल कटने के पक्ष में भी है। बकस्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन के सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि हमारा कार्यक्रम पूरी तरह शांतिप्रिय व कोरोना गाईडलाईन का पालन करते हुए बनाया गया था, अमित का कहना है कि पता नहीं किस मजबूरी के कारण प्रशासन शांतिप्रिय तरीके के विरोध के रास्ते को खत्म करना चाहता है। हमारी अभिव्यक्ति की आजादी को छीनी जा रहा है। अमित का कहना है कि ये जीवन बचाने की लड़ाई है, जिसे आखिरी सांस तक पूरी ताकत से लड़ा जाएगा। सत्याग्रह का जंगल कटने के पक्ष के कुछ लोगों द्वारा विरोध भी किया गया।


