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April 22, 2026
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बिजावर के बालक को महाराष्ट्र के महामहिम राज्यपाल ने किया सम्मानीय

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बिजावर/सुरेश रजक
बिजावर की माटी के लाल गोविंद विश्वकर्मा ने अपना और बिजवार का नाम महाराष्ट में रोशन किया प्राप्त जानकारी के अनुसार 13 जुलाई को बिजावर में जन्मे एवं पले बढ़े हुए गोविंद विश्वकर्मा को आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के क्षेत्र में महाराष्ट्र के महामहिम राज्यपाल श्री भगत सिंह कोश्यारी जी द्वारा स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया,

इस उपलब्धि पर गोविंद विश्वकर्मा ने बुन्देली खबर से बातचीत में कहा:
मैं वैधराज गोविन्द विश्वकर्मा, बिजावर- जिला छतरपुर मध्यप्रदेश से आज दिनांक- 13/07/2021 को गवर्नर हाउस महाराष्ट्र मुंबई माया नगरी में, मुझे अवार्ड से नवाज़ा गया, यह देखकर मेरा पूरा परिवार बहुत खुश हैं एवं गर्व महसूस कर रहा हैं । मैं एक छोटे से गाँव से हूँ । मुझे महाराष्ट्र गवर्नर साहब जी श्री भगत सिंह कोश्यारी के हाथों स्मृति चिन्ह से आयुर्वेद का प्रचार प्रसार के उपलक्ष अवार्ड से नवाज़ा गया ये अवार्ड प्राप्त करना मेरे एवं पूरे बुंदेलखंड के निवासियों के लिए गर्व एवं सम्मान की बात हैं ।
मैं पिछले कई वर्षो से आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों द्वारा जनकल्याण कार्य करता आ रहा हूं। मेरे इस कार्य को महाराष्ट्र गवर्नर श्री भगत सिंह कोश्यारी जी द्वारा सम्मान योग समझा गया ये मेरे लिए बहुत गर्व की बात हैं। मुझे निरंतर इसी मार्ग पर कार्यरत रहने की प्रेणना एवं ऊर्जा स्रोत हैं।कोरोना महामारी संकट के समय मैं और मेरी संस्थान “ऋषि अमृत बूटी सेवा संस्थान” द्वारा न सिर्फ मेरे निवास स्थान से अपितु ऐसे दुरस्थ कस्बों, गांवो में जाकर के लोगो को सहायता सामग्री समय समय पर वितरित की जाती रही हैं। ये उन सब लोगो की दुवाए ही हैं। जनकल्याण ही मेरा धर्म हैं। निरोगी काया में ही पवित्र आत्मा का निवास हो सकता है, ऐसा मेरा मानना हैं और इसी बात को मैंने अपना जीवन उद्देश्य बनाकर प्राचीन आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों की खोज में प्रयत्न शील रहता हूं। इन्ही प्राचीन जड़ी बूटियों की मदद से बड़े से बड़े असाध्य रोगों से लोगो को मुक्ति दिलाई हैं और उनके अंदर एक नई आशा किरण प्रज्वलित की। जिन लोगो ने अपने ठीक होने की उम्मीद भी शायद खो दी थी।
मेरे इन्ही सब कार्यों के लिए मुझे ये सम्मान स्मृति चिन्ह दिया गया।
आप सभी निरोगी रहे और आपके विचार पवित्र हो ऐसी मैं ईश्वर से कामना करता हूं। धन्यवाद। जय माता दी। जय भगवान धन्वंतरि।


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