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April 18, 2026
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बुंलद हौसलों की उड़ान

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एडिटर डेस्क(सौरभ शर्मा)- ये जरूरी नहीं कि शारीरिक दिव्यांगता आपको कमजोर बना देती है। कमजोर तो आपके हौसले हो जाते हैं, कमजोर आपकी सोच हो जाती है, कमजोर आपके इरादे हो जाते है। बचपन मे दो लाइन सुनी थी कि “रख हौसले बुलंद तो वो मंजर भी आयेगा, प्यासे के पास एक दिन समुंदर भी आएगा।” इन्ही पंक्तियों को चरितार्थ किया एक नोजवान लड़के ने, जी हम बात कर रहे हैं भारत के एक ऐसे व्यक्ति की जिसने अपने बुलंद इरादों और सकारात्मक सोच के चलते वो मुकाम हासिल किया जिसके लिए लगभग प्रत्येक नौजवान तरसता है। ये कहानी है “भारत देश के पहले दृष्टिहीन कलेक्टर IAS श्री गोपाल कृष्ण तिवारी जी” की। जिन्होंने अपने बुलंद हौसलों और सकारात्मक सोच के चलते यह दर्जा हासिल किया। सकारात्मक सोच ऐसी कि वो कहते हैं कि ” I am not blind, only my eyes can’t see.”

गोपाल कृष्ण तिवारी जी

बचपन में गोपाल कृष्ण तिवारी की नज़र आंशिक रूप से काम कर रही थी। पर समय के साथ ही, उनकी नज़र पूरी तरह से चली गई। पर इस बात ने उनका हौंसला नहीं तोड़ा,बल्कि उनकी जीने की और कुछ कर दिखाने की ललक बढती ही गई। और फिर उन्होंने ऐसा कुछ कर दिखाया, जिससे उनके परिवार को उनपर जीवन भर फक्र रहेगा। गोपाल कृष्ण तिवारी साल 2008 में आईएएस के लिए चुने गए और सामान्य श्रेणी में उनका रैंक था 142, जो एक आम इंसान के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता। उन्होंने विकलांग वर्ग में तो इस परीक्षा में टॉप किया ही, साथ ही महज 28 साल की उम्र में उन्हें यह उपाधि मिली।


गोपाल कृष्ण मूलतः उत्तर प्रदेश के रहनेवाले हैं और उनके पिता एक सामान्य किसान हैं। इसी वजह से उन्हें आईएएस बनने और अपनी पढ़ाई पूरी करने में आर्थिक रूप से भी समस्याएँ आईं। यूपीएससी में चुने जाने के बाद उन्होंने देहरादून की लाल बहादुर प्रशासनिक अकादमी से ट्रेनिंग ली और मध्यप्रदेश कैडर जॉइन किया। इसके बाद उनकी पहली पोस्टिंग भोपाल में एसडीएम के पद पर हुई। इसके बाद उन्होंने उमरिया कलेक्टर का भी पदभार संभाला। गोोोपपगोपाल कृष्ण जी की एक खासियत और देशभक्ति के आगे बड़े से बड़े अफसर डरते हैं। उन्हें भ्रष्टाचार से सख्त नफरत है और वे अब तक चालीस से ज्यादा अधिकारियों के खिलाफ अलग-अलग सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी करने के आरोप में मामले दर्ज करवा चुके हैं। साथ ही जिला की व्यवस्था का ध्यान रखने के लिए वे विभिन्न सरकारी कार्यालयों और जिला अस्पतालों में विजिट करते रहते हैं।


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