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Madhya Pradesh
June 25, 2026
Bundeli Khabar
मध्यप्रदेश

किसानों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन 

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समाधान नहीं होने पर लोकतांत्रिक एवं सत्याग्रही तरीके से आंदोलन की चेतावनी

पाटन //राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार कक्काजी एवं राष्ट्रीय संगठन मंत्री रविदत्त सिंह के निर्देश पर जबलपुर जिला इकाई द्वारा किसानों की विभिन्न कृषि समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री के नाम अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मानवेन्द्र सिंह राजपूत को ज्ञापन सौंपा गया। जिलाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह एवं तहसील अध्यक्ष बलदेव सिंह ठाकुर सहित किसान महासंघ के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि प्रदेश के किसान वर्तमान समय में अनेक कृषि संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। किसानों के हित एवं कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए शासन से विभिन्न मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग की है।

ज्ञापन में मांग की गई कि गेहूं उपार्जन में पंजीयन एवं स्लॉट बुकिंग की त्रुटियों के कारण जिन किसानों की फसल समर्थन मूल्य पर नहीं बिक पाई है,उन्हें मंडी विक्रय दर और समर्थन मूल्य के अंतर की राशि भावांतर के रूप में दी जाए। वहीं ग्रीष्मकालीन मूंग की पूरी पंजीकृत फसल समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए तथा मजबूरी में मंडियों में फसल बेचने वाले किसानों को भावांतर योजना का लाभ दिया जाए।

किसान नेताओं ने मंडियों में एपीएमसी एक्ट के अनुसार फसलों के मूल्य निर्धारण एवं विक्रय व्यवस्था लागू करने,दुग्ध उत्पादक किसानों को उत्पादन लागत के आधार पर उचित मूल्य देने,दूध का भाव 12 रुपए प्रति फैट करने एवं शासन द्वारा घोषित 5 रुपए प्रति लीटर बोनस राशि का भुगतान शीघ्र करने की मांग रखी।

इसके अलावा सब्जी एवं फल मंडियों में आड़त व्यवस्था समाप्त करने, मंडी टैक्स में की गई वृद्धि वापस लेने,फार्मर आईडी एवं ई-टोकन के माध्यम से खाद वितरण में आ रही परेशानियों को दूर कर पूर्व व्यवस्था लागू करने की मांग भी की गई।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि कृषि भूमि से गुजरने वाली हाईटेंशन लाइन,पाइपलाइन,केबल लाइन एवं सड़क निर्माण से प्रभावित किसानों को बाजार भाव के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को तत्काल सुधारने की मांग की गई।

किसान महासंघ पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का समय सीमा में निराकरण नहीं किया गया तो किसान एवं ग्रामीणजन लोकतांत्रिक एवं सत्याग्रही तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे,जिसकी जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।


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