पाटन/संवाददाता
शासन द्वारा प्रतिबर्ष समर्थन मूल्य पर किसानों का अनाज खरीदा जाता है ताकि देश के कर्णधार किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य प्राप्त हो सके एवं बाज़ार और मंडियों में होने वाली असुविधा से बच सकें, किंतु इसका उल्टा पाटन क्षेत्र के खरीदी केंद्रों में हो रहा है।
शासन योजनाएं तो बड़ी बड़ी बनाता है किंतु उनका क्रियान्वयन सही तरीके से नही कर पाता है जिसका खामियाजा ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को भुगतना पड़ता है, शासन-प्रशासन ने खरीदी केंद्र तो खोल दिये हैं किंतु उन पर व्यवस्थाएं मुहैया कराने में बोने सिद्ध हो रहे हैं, न किसानों को समुचित बारदाना मिल पा रहा है और न ही धान का परिवहन किया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर कई किसानों की धान की तुलाई हो कर वेयर हाउस में अंदर कर दी गई किंतु आज तक न ही कोई मेसेज आया है न पैसे मिलने का ठिकाना है काफी सारे किसान तो अपना माल लिए घूम रहे हैं किंतु कोई सुनवाई नही हो रही उल्टा अधिकारी उन्हें दलाल के नजरिये से देखते हैं।
उक्त संबंध में पूर्व में भी जिला पंचायत सदस्य ठाकुर उदय भान सिंह द्वारा भी एक ज्ञापन सौंपा गया था किंतु उस पर भी शासन प्रशासन उदासीन ही बना रहा, और उनके कानों पर जूं भी नही रेंगा।
किसानों के अनुसार अगर हम अपनी समस्या को लेकर तहसील के मालिक के पास भी जाते हैं तो वो भी अपना पल्ला झाड़ कर गेंद खाद्य बिभाग की पाली में फेंक देते हैं और आवेदन तक लेने को इंकार कर देते हैं, यहाँ तक जो शासन द्वारा कार्यशैली बनाई गई है कि आम जनता से अधिकारी शालीनता से बात करेंगे उनकी समस्या समझेगें तो उसका उल्टा हम से जोर से चिल्लाकर बात की जाती है ये अन्नदाताओं का अपमान नही तो क्या है, इसको प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के सपनो पर बट्टा लगाना ही कह सकते हैं। हमें तुलाई के बाद कच्ची पर्ची पकड़ा दी जाती है जिसका कोई महत्व भी नही होता किंतु प्रशासनिक अधिकारी इन सारी अनियमितता को नजरअंदाज कर रहे हैं।


