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May 25, 2026
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उत्तरप्रदेश

महिला शक्ति, राष्ट्र शक्ति- समाजशास्त्री डॉo शीबा खालिद

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फ़रीद अंसारी / उत्तरप्रदेश
बिजनौर : महिलाओं में वो ताकत है कि वो समाज और देश में बहुत कुछ बदल सकें। भारत में महिलाओं ने अपनी मेहनत और काबिलीयत के दम पर सफलता के कई ऐसे मुकाम हासिल किए हैं जो हर किसी के लिए एक मिसाल हैं। वैसे तो भारत में अनगिनत महिलाएं हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। लेकिन मैं आपको एक ऐसी महिला के बारे में बता रही हूँ जो राजनीति, लेखन, समाज सेवा जैसे क्षेत्रों से जुड़ी एक प्रभावशाली महिला हैं और जो हम सब महिलाओं के सामने एक उदाहरण हैं।

जूही सिंह (राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला सभा, समाजवादी पार्टी), जिन्होंने बी.कॉम इलाहाबाद यूनिवर्सिटी तथा एमएससी कि डिग्री लन्दन यूनिवर्सिटी से प्राप्त की |
इसके पहले वह पत्रकारिता से जुडी रही और सामाज सेविका के रूप में भी उनकी छवि उभर के सामने आई है |


जूही सिंह जी को मैंने कई बार टीवी चैनलों पर, सपा की प्रवक्ता के रूप में देखा और सुना, मुझे तभी उनके व्यक्तित्व ने बहुत आकर्षित किया क्योंकि मैंने प्रवक्ताओं को हमेशा चिल्लाते, चीखते, मुद्दों से हट के बात करते या एक दूसरे पर लांछन लगाते देखा और सुना, पर बहुत ही कम सुलझे हुए, शांति पूर्ण दूसरों को सुनने वाले और तब अपनी बात को सहजता से रखने वाले प्रवक्ताओं को सुना और देखा, जूही जी उन सभ्य लोगों में से एक हैं | कभी भी क्रोध न दिखाना अपनी बातों को सहजता से रखना, इस बात को पूरी तरह से साबित करता है कि एक सभ्य और शिक्षित व्यक्ति हर जगह अपनी अलग ही पहचान बनाता है |
खुशकिस्मती से जूही जी से मेरी पहली मुलाक़ात, मेरी किताब “मै अखिलेश” और “I Am Akhilesh” के विमोचन (अखिलेश यादव द्वारा,7 अगस्त 2021, लखनऊ) के बाद उनके ऑफिस में हुई | एक बहुत ही साधारण, सुलझी हुई, बहुत ही खुशमिजाज़ महिला, जो कि बहुत ही आदर के साथ मुझे मिली, हमने साथ बैठ के कॉफ़ी पी और बहुत सारी बातें मेरी किताब के विषय में तथा आने वाले चुनाव में महिलाओं से जुड़े मुद्दों पे की | उनसे बातें करते समय मुझे इस बात का एह्सास हुआ कि समाजवादी पार्टी आने वाले चुनाव में, महिला सशक्तिकरण, और उनसे जुडी समस्याओं तथा मुद्दों को लेकर बहुत ही गंभीर है | तभी राष्ट्रीय सपा अध्यक्ष अखिलेश जी ने जूही सिंह जी जैसी सक्षम महिला को राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला सभा बनाया, क्योंकि वह इस बात को बहुत ही भली भांति जानते हैं कि जूही सिंह जी समाज से जुडी हुई महिला हैं पहले भी वह अपने सामाजिक कार्यो के द्वारा महिलाओं कि परेशानियों को समझने और दूर करने जैसे कार्यों से जुडी रही हैं | जूही जी ने मुझे बताया कि “सभी वर्ग कि महिलाओं को आगे आना चाहिए तथा सपा के घोषणा पत्र में महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखनी चाहिए ताकि हम उसे आने वाले घोषणा पत्र में जोड़ सकें और अपनी सरकार बनने के बाद उन पर सुचारू रूप से कार्य कर सकें | जैसा कि हम सब जानते हैं अपने कार्यकाल में अखिलेश सरकार ने महिलाओं से जुडी बहुत सी समस्याओं पर गंभीरता से कार्य किया तथा महिलाओं को सशक्त बनाने का प्रयास भी किया |


जूही जी ने मुझे बताया कि डिंपल यादव जी जो कि अखिलेश यादव जी कि पत्नी हैं वो भी किस तरह से महिलाओं से जुडी समस्याओं और सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं तथा इन समस्याओं को सुलझाने के लिए आगे आकर अपने पति का साथ दे रही हैं, मुख्य रूप से पिछड़े दलित तथा अल्पसंख्यक वर्ग कि वह महिलाएं जो आज भी सही शिक्षा, स्वास्थ्य आदि कि परेशानियों से जुझ रही हैं |
जूही जी ने मुझे बताया “हमें महिलाओं को जाति, धर्म के आधार पर नहीं बाँटना चाहिए, महिला चाहे किसी भी वर्ग, जाति, धर्म कि हो अगर हमारे देश कि महिला सशक्त होगी तभी हमारा देश विकसित देशो कि श्रेणी में आगे बढेगा” | मै जूही जी कि इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ क्योंकि ये हम सभी जानते हैं कि किसी संस्कृति को अगर समझना है तो सबसे आसान तरीका है कि उस संस्कृति में नारी के हालात ओर महत्व को समझने की कोशिश की जाए। किसी भी देश के विकास संबंधी सूचकांक को निर्धारित करने हेतु उद्योग, व्यापार, खाद्यान्न उपलब्धता, शिक्षा इत्यादि के स्तर के साथ ही उस देश की महिलाओं की स्थिति का भी अध्ययन किया जाता है। नारी की सुदृढ़ एवं सम्मानजनक स्थिति एक उन्नत, समृद्ध तथा मज़बूत समाज की पहचान है।


जूही जी से बातें करने के बाद मुझे बहुत ही प्रसन्नता और सम्मान का अहसास हुआ | अगर जूही जी जैसे शिक्षित लोग हमारे देश कि राजनीति का हिस्सा हों तो समाज कि समस्याओं को हम सही ढंग से सुलझा सकते हैं |
अखिलेश जी ने शिक्षित, सभ्य और प्रगतिशील सोच रखने वाले लोगों को तथा युवाओं को जोड़कर उत्तर प्रदेश कि राजनीति को एक नया रूप देने का प्रयास किया है, और इस बात को साबित किया है हमारी प्रगतिशील सोच और शिक्षा ही हमारे देश कि तुष्टिकरण और भेद भाव की राजनीति को बदल सकती है और तभी एक शिक्षित, सभ्य समाज कि स्थापना हो सकती है | “सोच बदलेगी तभी देश बदलेगा”


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