महापौर मुरलीधर मोहोल ने राज्य सरकार पर कोरोना नियमों में ढील को लेकर लगाया भेदभाव का आरोप ।
पुणे के प्रतिबंध को लेकर पुणे के महापौर ने किया हल्लाबोल ।
मुम्बई / प्रमोद कुमार
पुणे : राज्य सरकार ने सोमवार को राज्य के 25 जिलों में कोरोना प्रतिबंधों में ढील देने का फैसला किया। 11 जिलों में लेवल 3 की पाबंदियां बरकरार रखी गई हैं। पुणे प्रतिबंधित जिलों में से एक है। मुंबई और पुणे इन दोनो शहरों के साथ भेदभाव क्यों? ऐसा सवाल करते हुए पुणे के महापौर मुरलीधर मोहोल ने कहा कि पुणे को लेकर पालकमंत्री कुछ बोलते हैं, स्वास्थ्य मंत्री कुछ और बोलते हैं और मुख्यमंत्री कुछ और ही हैं। महापौर मुरलीधर मोहोल ने राज्य सरकार पर कोरोना नियमों में ढील को लेकर भेदभाव का आरोप लगाया है। उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पुणे में पाबंदियां हटाने को लेकर पालक मंत्री एक बयान देते हैं, स्वास्थ्य मंत्री दूसरा बयान देते हैं और मुख्यमंत्री अलग भूमिका निभाते हैं। राज्य सरकार ने राज्य के 25 जिलों में पाबंदियों (Restrictions) में ढील देने का फैसला किया है। नए नियमों के मुताबिक 25 जिलों में सभी दुकानें सोमवार से शुक्रवार 8 बजे तक खुली रहेंगी। शनिवार दोपहर तीन बजे तक दुकान खुली रहेगी। लेकिन रविवार को पूरी तरह बंद रहेगा। जबकि इन सभी नियमों पर पुणे फिट बैठता है, तो पुणे (Pune) से पराए जैसा व्यवहार क्यों? यह सवाल मुरलीधर मोहोल ने राज्य सरकार से पूछा है।
राज्य के 11 जिलों में कोरोना मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है। साथ ही संक्रमण की दर अन्य जिलों के मुकाबले ज्यादा है। अधिक सक्रिय कोरोना मरीजों वाले जिले पुणे, सातारा, सांगली, कोल्हापुर, अहमदनगर, सोलापुर, रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, बीड और पालघर हैं। इसलिए जिलों में तीसरे स्तर की पाबंदियां बरकरार रखी गई हैं। हालांकि मोहोल ने राज्य सरकार पर प्रतिबंध हटाने पर पुणे के मामले में राजनीति करने का भी आरोप लगाया है।
इस बीच, पुणे शहर के व्यापारी पिछले कई दिनों से कोरोना प्रतिबंधों को लेकर आक्रामक हैं। व्यापारी सरकार से पुणे में प्रतिबंध हटाने का आग्रह कर रहे हैं। व्यापारियों को उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री द्वारा प्रतिबंध हटाने की घोषणा के बाद पुणे में भी प्रतिबंध हटा लिए जाएंगे। हालांकि, प्रतिबंध बरकरार है, इसलिए व्यापारी अधिक आक्रामक हो गए हैं।
व्यापारियों ने राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया है। महापौर मुरलीधर मोहोल ने स्पष्ट किया है कि वह व्यापारियों के इस आंदोलन का समर्थन करते हैं।

