जबलपुर / ब्यूरो
गरीबों पर भुखमरी की तलवार ,,,,,
मझौली मध्य प्रदेश ग्रामीण विकास विभाग के प्रदेश भर के 70 हजार अधिकारी कर्मचारी के विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन पर चले जाने से ग्राम पंचायतों से जुड़े मजदूर एवं गरीबों पर संकट मंडराने लगा है अगर यह आंदोलन अधिक समय तक चला तो आम जन तो क्या गरीब लोगों को भी जीने मरने की नौबत आ जाएगी l
मध्य प्रदेश ग्रामीण विकास विभाग द्वारा लगातार अपनी मांगों को लेकर प्रदेश के मुखिया के समक्ष अपनी मांगें रखी गई लेकिन प्रदेश के मुखिया द्वारा उनकी मांगों को लेकर ना सिर्फ अनदेखी की गई अपितु वादाखिलाफी भी की गई,
रोजगार सहायक संघ द्वारा मुख्यमंत्री निवास में 25 अगस्त 2018 को मुख्यमंत्री जी से वार्ता की गई एवं 3 सितंबर 2020 को पंचायत मंत्री महेंद्र सिसोदिया से भी भेंट की गई लेकिनअभी तक इस विभाग की अनसुनी ही की गई जिसके चलते कल दिनांक 19 जुलाई से विभाग के अधिकारी कर्मचारी आंदोलन पर जाने को मजबूर हो गए वही चेतावनी भरे स्वर में कहा गया कि अगर उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया तो 22 तारीख से ताला बंद हड़ताल कर दिया जावेगा l
17 संगठनों का मिला समर्थन,,,,,,,
वही इस विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में 17 अन्य संगठनों भी मैदान में कूद पड़े है जिससे यह आंदोलन अपना व्यापक रूप धारण कर सरकार को अपनी हठधर्मिता को छोड़ने पर विवश कर सकता है ।
खजाना खाली होने का रोना रोती है सरकार,,,,,,,,,,
मध्य प्रदेश पंचायत विभाग के संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक दिनेश शर्मा द्वारा सरकार के वर्ताव को कटघरे में लेते हुए कहा कि जब भी कर्मचारियों के हित की बारी आती है तो सरकार खजाना खाली होने का बहाना कर कभी उनकी डीए,
कर्मउन्नति,सातवें वेतन,की किश्त आदि पर ताला लगा दिया जाता है और अपने नेताहित के लिए खजाने का मुंह खोलकर अनाप-शनाप छुड़ाया जाता है जिससे अधिकांश विभाग के अधिकारी कर्मचारियों में रोष व्याप्त है जिसका नतीजा अब इन आंदोलनों एवं हड़ताल के रूप में नजर आने लगा है l
प्रदेश के गरीब तबके पर संकट ,,,,,,,,,
इस आंदोलन से पंचायत के 70 हजार अधिकारी व कर्मचारियों आंदोलन की राह पर है जिसकी वजह से 313 जनपदों की तीनों इकाइयों में (ग्राम,से जिले) काम बंद कर दिया जिसके चलते ग्रामीण जनजीवन प्रभावित होगा इन गरीबों को जहां खाद्यान्न का संकट बढ़ेगा वहीं मनरेगा में कोई काम ना मिलेगा भूखे मरने की नौबत आने पर ना आवास योजना में इन्हें मजदूरी मिलेगी ना ही अंत्येष्टि योजना का कोई लाभ मिलेगा जिससे ग्रामीण जीवन संकट में पड़ जाएगा।


