.कोरोना की मार झेल रहे किसान हो रहे परेशान
.धड़ल्ले से काटे जा रहे कनेक्शन
पाटन / सजल सिंघई
जहाँ एक ओर प्रदेश के मुखिया मामा जी किसानों के हित में नित नई योजनाएं बना रहे हैं वहीं दूसरी ओर उन्ही के नुमाइंदे उनके सपनों को तार तार कर रहे हैं, म.प्र. शासन द्वारा फसल बीमा, कर्जा माफ, विद्युत आपूर्ति जैसी कई योजनाएं बनाई गई किन्तु प्रशासन द्वारा नए-नए तरीके ईजाद कर किसानों को परेशान किया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जबलपुर जिले के पाटन क्षेत्र में एक नया ही वाकया सामने आया है, जहाँ लोगों के घर के कनेक्शन मात्र इसलिये काटे जा रहे हैं क्योंकि उनका कृषि बिल बकाया है, किसानों के अनुसार विद्युत विभाग पाटन अपनी एक तरफा तानाशाही कर रहा है की खेती का बिल बकाया होने पर घर के कनेक्शन काट रहा है और अधिकारियों द्वारा हवाला दिया जाता है शासन द्वारा आदेश किया गया है कि जिस किसान का खेती का बिल बकाया है उसका घरेलू कनेक्शन काट दिया, किन्तु जब किसान द्वारा उक्त आदेश सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत आदेश मंगाया जाता है तब हिला-हवाली की जाती है और आदेश नही दिखाया जाता है अब इसे बिजली विभाग की तानाशाही नही तो ओर क्या कहेगें, क्योकि एक ओर तो प्रदेश सरकार अपने आप को किसानों की सरकार बताती है तो वहीं दूसरी ओर किसानों को उन्ही के बिभागों द्वारा परेशान किया जाता है। ऐसा नही हैं कि विद्युत विभाग के आला अधिकारियों को इस बात की झनक भी न हो, क्योंकि विभाग के आला अधिकारी भी पाटन में ही कार्यरत हैं एवं यहीं बैठते है और ये सब कृत्य उनकी नाक के नीचे ही हो रहा है किंतु उनके कानों पर जूं भी नही रेंगता है शायद इसलिये भी कि उनको अपने बिल बसूली का टारगेट भी पूरा करना है, या शायद बिजली बिभाग पाटन को सुर्खियों में रहने की भी आदत है गैरतलब है कि अभी पिछले दिनों यहाँ के कर्मचारियों का एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें शासकीय कार्यालय में भी कर्मचारी जुआ खेलते हुए देखे गए थे।
हालांकि इसके विपरीत म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड संभाग पाटन के कार्यपालन अभियंता द्वारा पुलिस थाना पाटन में अपनी सुरक्षा हेतु एक आवेदन दिया गया, जिसमे यह उल्लेख किया गया है कि तकनीकी कारणों से बार-बार विधुत का अवरोध होता है जिससे स्थानीय लोग भीड़ के साथ स्टेशन पहुंच कर लाइट चालू करने का दबाब बनाते है जिस कारण पाटन केंद्र सहित उपकेंद्रों को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए।

गैरतलब है कि बरसात के पहले विद्युत बिभाग का मेंटेनेंस का कार्य चलता है जिससे अगले बरसात के 4 महीने मेंटेनेंस की जरूरत न पड़े, और विद्युत आपूर्ति में अवरुद्ध पैदा न हो सके, तो फिर बिभाग द्वारा कैसा मेंटीनेंस कराया गया कि बिना बरिश ही तकनीकी दिक्कतें पैदा होने लगी, फिर दूसरी बात यह सामने आती है कि जब बिजली तकनीकी खराबी होने के कारण गोल हुई है तो किसी के दबाब बनाने से चालू कैसे हो सकती है, इससे तो केवल एक ही बात सामने आती है कि शायद किसान अपनी समस्याएं ले कर आपके कार्यालय तक पहुंचें ही नही और उनको पुलिस के द्वारा बाहर रोक दिया जाए।

