बिजावर/संवाददाता
शारदीय नवरात्र के अवसर माँ जगतजननी अपने समस्त रूपों के साथ धरा पर विराजतिं हैं माँ जगतजननी के रूपों में सबसे विकराल रूप माँ महाकाली बिजावर नगर के मोहल्ला मोहंगनज के साकेत धाम श्री हनुमान मंदिर पर बिराजति हैं, लगभग पिछले 50 बर्षों से माँ के इस रूप की मूर्ति स्थापना की जाती है जहाँ नगर वासी बड़ी भक्ति भावना के साथ माँ की पूजा अर्चना करते हैं।
ज्ञात हो कि कविराज बिहारी जी एवं संत कवि रसरंग जी जन्मभूमि मोहंगनज बिजावर साहित्य प्रेमियों के लिए एक श्रद्धा का केंद्र माना जाता है, जहाँ पिछले 50 बर्षों से प्रतिबर्ष शारदीय नवरात्र पर अनवरत माँ के नौ दिनों अखण्ड रामधुन का पाठ भी किया जाता है नगर वासियों के अनुसार उक्त रामधुन की परिपाटी संत कवि रसरंग जी द्वारा चलाई गई थी जो आज भी लोगों के सहयोग से जारी रखी जा रही है।

