गायत्री साहू,
मुम्बई। ‘द इम्मोर्टल्स’ म्यूजिक एल्बम में सभी ग़ज़ल रवींद्र जैन द्वारा लिखे गए हैं। प्रतिभाशाली गायिका रितु जौहरी ने इन ग़ज़ल को अपनी मधुर आवाज से सजाया है। ‘द इम्मोर्टल्स’ में पांच ग़ज़ल हैं जिनके बोल हैं ‘बेबासी दे गया’, ‘उमर भर इम्तिहान लेती है’, ‘अब जो जिंदगी है’, ‘झूठे को भी वो हाल मेरा’ और ‘जिन पर ग़ज़ल कहीं’। रितु ने ये सभी ग़ज़ल गाए हैं जिसे शिव राजोरिया ने संगीत से सजाया है।
रितु जौहरी कहती हैं कि महान गायक और संगीतकार रवींद्र जैन द्वारा लिखे गए ग़ज़ल को गाना एक सम्मान की बात है। संगीत में डॉक्टरेट की पढ़ाई के दौरान मुझे दादू का सानिध्य प्राप्त हुआ और उनके परिवार का हिस्सा बनने का अवसर मिला। उनकी पत्नी का मेरे जीवन में महत्वपूर्ण योगदान है जिसके लिए मैं सदा उनकी ऋणी रहूंगी। दादू ने अपने जीवन में सफलता हासिल कर भी सरल और सादा जीवन जिया। वे जमीन से जुड़े व्यक्ति थे। वे जन्मांध थे फिर भी उसके पास संगीत को समझने की अभूतपूर्व क्षमता थी जो दृष्टिवाले व्यक्ति के पास भी संभव नहीं। उनकी इस रचनात्मकता से पूरी दुनिया हैरान थी कि आखिर इन्होंने ऐसा कैसे किया। ‘द इम्मोर्टल्स के ग़ज़ल के बोल भी उनकी अविश्वसनीय प्रतिभा का प्रमाण हैं।
रितु जौहरी ऑल इंडिया रेडियो, आगरा की बी. हाई ग्रेड आर्टिस्ट हैं। वह नियमित रूप से दूरदर्शन और A.I.R पर प्रदर्शन करती हैं। उन्हें संगीत शिरोमणि, संगीत सुमन और संगीत कल्प की उपाधियों से सम्मानित किया गया है।
2010 में मशहूर ग़ज़ल गायक गुलाम अली के साथ रितु का डेब्यू अलबम ‘बेगानी’ को विजन कॉर्पोरेशन ने रिलीज किया था। हाल ही में रूपकुमार राठौड़ के साथ उनका ग़ज़ल अलबम ‘परसेप्शन’ भी रिलीज हुआ था।
गौरतलब हो कि आगरा में एक संगीतमय घराना परिवार में जन्मी रितु जौहरी ने अपने नाना स्वर्गीय पं. सुनेहरी लाल शर्मा ने गायकी के गुर सीखीं जो आगरा के प्रसिद्ध संगीतकार रहे। फिर उन्होंने स्वर्गीय उस्ताद शब्बीर अहमद खान से आगरा घराने गायक की तालीम भी ली। उनकी माँ श्रीमती मिथलेश जौहरी संगीत की व्याख्याता और एक प्रसिद्ध ग़ज़ल गायिका हैं उनसे भी रितु ने ग़ज़ल गायन सीखा। साथ ही उन्हें अपने पिता एस एस जौहरी जो एक सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर हैं, उनसे प्रोत्साहन और प्रेरणा मिली।

