संतोष साहू,
मुंबई। विश्व पर्यावरण दिवस मनाने और ग्लासगो सम्मेलन में की गई प्रतिबद्धता का सम्मान करने के लिए, मुंबई के सेंट एंड्रयू’ज़ हाईस्कूल ने 5 जून को ज़ीरो आउट कार्बन कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर शिक्षकों और बच्चों ने अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया, जिससे मुंबई को 2050 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। मुंबई में स्वीडन के दूतावास में राजदूत एरिक मालम्बर्ग ने इस पहल और इवेंट की सराहना करते हुए कहा, “रोजमर्रा के जीवन में स्थिरता को व्यवहार में कैसे लाया जाए, इसके लिए नौजवानों के साथ काम करना बहुत जरूरी है। वह भविष्य में बदलाव लाने में प्रमुख भूमिका निभाएंगे। यह मिशन कला, रचनात्मकता और सार्थक जुड़ाव से प्रतिभाओं का पोषण करता है और उन्हें और निखारता है।
सेंट एंड्रयू’ज़ एजुकेशनल फाउंडेशन के रेक्टर और ट्रस्टी फादर मैगी मुर्जेलों ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की। वह चाहते थे कि आजकल के नौजवान पोप की शिक्षाओं का पालन करें और भारत में कार्बन उत्सर्जन में कटौती के उपायों की शुरुआत हो, जैसा कि नवंबर 2021 में ग्लासगो में हुए संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में वादा किया गया था। छात्रों को बेहतर विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए फादर मैगी ने उन्हें भारत के सुनहरे अतीत पर निर्भर रहते हुए अपने भविष्य के बारे में सोचने के लिए स्वीडन से प्रेरणा लेने के लिए कहा।
एक्सपर्ट ऐना एहन ने शहर के 35 से ज्यादा स्कूलों के बच्चों को संबोधित किया। उन्होंने छात्रों को बदलाव लाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, “हमें जगह-जगह गंदगी फैलाना बंद करना होगा, रिसाइक्लिंग शुरू करनी होगी और प्लास्टिक के इस्तेमाल में कटौती करनी होगी। हम सभी समाधान का हिस्सा हैं।
विचार-विमर्श के अलावा, छात्रों ने 75 मिनट का नाटक “आई वॉन्ट टु बी ए हमिंग बर्ड” देखा। इस नाटक में आजकल की दुनिया में सादा जीवन जीने की अहमियत पर प्रकाश डाल गया। इस अवसर पर स्वीडन ने अपनी डिजिटल प्रदर्शनी, ‘रि: वेस्ट-हाउ स्वीडन इज रिथिंकिंग रिसोर्सेज’ का भी प्रदर्शन किया। इसमें छात्रों को बेहतर भविष्य के लिए काम करने को प्रोत्साहित किया गया। इस प्रदर्शनी में उन उपायों के बारे में बताया गया कि कैसे हम साझा करने के साधारण सिद्धांतो को अपनाने से प्रॉडक्ट्स को दोबारा रिसाइकिल करने और उसे दोबारा इस्तेमाल करने से पर्यावरण के लिए हानिकारक पदार्थों को हानिरहित बनाकर उनकी जिंदगी बढ़ा सकते हैं।
हालांकि, ज़ीरो आउट कार्बन इवेंट एक अच्छी शुरुआत थी, लेकिन मुंबई और भारत को इस दिशा में काफी लंबा सफर तय करना है। फादर मैगी मुजेर्लो ने उम्मीद जताई कि मुंबई आर्कडियोसीज से संबंधित सभी स्कूलों में स्वच्छ पर्यावरण की गतिविधियं वर्ष भर चलती रहेंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्कूलों और घरों में संवहनीय गतिविधियों को शामिल करने के लिए स्वीडन के साथ भारत के बढ़ते संबंधों पर भरोसा करना होगा। स्वीडन ने वर्ष 1967 से स्वच्छ पर्यावरण के संरक्षण के लिए सक्रिय और उल्लेखनीय प्रयास किये हैं। स्वीडन दुनिया का पहला देश है, जहां पर्यावरण सुरक्षा कानून पारित हुआ था। प्रदूषण को खत्म करने के लिए स्वीडन की निर्भरता अतीत के संरक्षण और भविष्य को सुरक्षित रखने पर बढ़ी है। पारंपरितक जीवाश्म ईंधन का प्रयोग करने की जगह स्वीडन नवीकरणीय ऊर्जा से अपनी बिजली संबंधी 50 फीसदी से ज्यादा जरूरतें पूरी कर रहा है।
भारत और स्वीडन ने पहले से ही सस्टेनेबिलिटी की दिशा में काम करने के लिए भागीदारी की है। दोनों देश बच्चों को इस अभियान में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, दोनों देश एक ऐसे भविष्य को लेकर तत्पर हैं, जहां लोग स्वच्छ पर्यावरण को सबसे पहले रखेंगे। अब जब ज़ीरो आउट कार्बन कैंपेन ने अपने पंख फैलाने शुरू कर दिए हैं, यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि भारत और स्वीडन एक-दूसरे से कितना सीख सकते हैं।

