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October 16, 2026
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हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 16 साल की सजा माफ कर दिलाया 42 लाख मुआवजा

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जबलपुर/सौरभ शर्मा
मध्य प्रदेश के भोपाल नगर के गांधी मेडिकल कॉलेज में साल 2009 में MBBS के फाइनल ईयर के छात्र पर प्रेमिका की हत्या का आरोप लगा था, इस मामले में भोपाल की कोर्ट ने छात्र को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, इस सजा को लेकर हाईकोर्ट में अपील की गई थी अब हाई कोर्ट ने छात्र को निर्दोष करार दिया है, इसके साथ ही हाई कोर्ट ने 42 लाख रुपये का मुआवजा भी देने का आदेश दिया।प्रेमिका की हत्या के मामले में सजा काट रहे छात्र को 13 साल बाद मध्य प्रदेश के जबलपुर हाई कोर्ट से न्याय मिला है, हाई कोर्ट ने भोपाल की अदालत से उम्रकैद की सजा पाए व्यक्ति को न केवल निर्दोष करार दिया, बल्कि उसे 42 लाख रुपये का मुआवजा भी देने का निर्देश दिया है, हाई कोर्ट ने सरकार को 90 दिनों के अंदर इस राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है. अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो सालाना 9 फीसदी ब्याज भी देना होगा।

जानकारी के अनुसार, यह मामला बालाघाट निवासी चंद्रशेखर मर्सकोले का है, दरअसल, साल 2009 में भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के फाइनल ईयर के छात्र चंद्रशेखर मर्सकोले पर अपनी प्रेमिका की हत्या का आरोप लगा था. आरोप था कि 19 अगस्त 2008 को छात्र ने अपनी प्रेमिका की हत्या कर शव पचमढ़ी के पास नदी में फेंक दिया था, घटना के दिन उसने अपने सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर हेमंत वर्मा से होशंगाबाद जाने के लिए गाड़ी मांगी थी, घटना के बाद भोपाल की अदालत ने 31 जुलाई 2009 को चंद्रशेखर मर्सकोले को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

याचिकाकर्ता के वकील एचआर नायडू ने बताया कि इसके बाद चंद्रशेखर ने इसको लेकर हाई कोर्ट में अपील की थी, चंद्रशेखर की ओर से हाई कोर्ट में दलील दी गई कि असल में डॉ. हेमंत वर्मा ने युवती की हत्या की थी और खुद को बचाने के लिए उसने चंद्रशेखर को झूठे केस में फंसा दिया, याचिका में उठाए गए तर्कों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने माना कि जांच में गड़बड़ी हुई, इस मामले में निर्दोष को 13 साल जेल में काटने पड़े, चंद्रशेखर मर्सकोले को हाई कोर्ट ने निर्दोष करार देते हुए उसे 42 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश जारी किया है।


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