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May 12, 2026
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आवास लोन के नाम पर ठगी करने वाले दंपत्ति समेत बैंक के अधिकारियों पर जबलपुर ईओडब्ल्यू ने किया मामला दर्ज

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जबलपुर/ब्यूरो

आवास लोन नियमों को दरकिनार कर बैंक प्रबंधक सहित बैंक कर्मियों से मिलीभगत कर नियम विरुद्ध ऋण लेने वालों के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने धारा 420,120 बी के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। मामले में धोखाधड़ी करने वाले आरोपियों को लोन देने से पहले तत्कालीन बैंक प्रबंधक और सहायक प्रबंधक ने जरूरी जांच-पड़ताल करना उचित नहीं समझा। बैंक की रकम मौजूदा समय में ब्याज सहित बढ़कर 18 लाख रु पए से अधिक हो चुकी है, ईओडब्ल्यू ने मामले में दंपती सहित 5 लोगों को आरोपी बनाया है।

ईओडब्ल्यू निरीक्षक मुकेश खंपरिया ने बताया, कि सिंडीकेट बैंक शाखा भरवेली बालाघाट से आवास लोन नियमों को दरिकनार कर स्वीकृत करने और आरोपी द्वारा पैसे न लौटाने को लेकर शिकायत मिली थी। प्रकरण में वार्ड नंबर क्रमांक 3 मॉयल कॉलोनी भरवेली निवासी आरिफ हुसैन, उनकी पत्नी समीमुन निशा उर्फ शमीभरन निशा, प्लाट मालकिन भटेरा निवासी समीना बेगम, तत्कालीन सिंडीकेट बैंक प्रबंधक श्रीधर एन डेकाटे और सहायक प्रबंधक लखिंद्र मंडी के खिलाफ धोखाधड़ी, साजिश रचने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का प्रकरण दर्ज किया गया है। मामले की जांच निरीक्षक मुकेश खम्परिया कर रहे हैं। सिंडीकेट बैंक शाखा भरवेली बालाघाट में वार्ड नंबर 3 निवासी मॉयल कॉलोनी भरवेली निवासी आरिफ हुसैन, उसकी पत्नी समीमुननिशा उर्फ शमीभरन निशा ने 12 जनवरी 2016 को 20 लाख रु पए आवास ऋण का आवेदन लगाया था। बैंक ने 15 जनवरी 2016 को ऋण स्वीकृत कर दिया। बैंक ने अलग-अलग तारीखों में 12 लाख 60 हजार 137 रु पए आरिफ के खाते में ट्रांसफर किए। आरोपी ने लोन पास कराने के लिए भटेरा चौकी निवासी शमीना बेगम से उनकी भटेरा चौकी स्थित प्लाट 9 लाख 50 हजार रु पए में खरीदने का अनुबंध पेश किया था, पर शमीना बेगम से मिलीभगत कर आरोपी ने इस राशि का उपयोग कर लिया।

बैंक के नियमानुसार इस प्लॉट को क्रय कर उसे बैंक में बंधक रखवाना था, पर आरोपियों ने न तो प्लॉट खरीदा और न ही बंधक रखवाया। बैंक से लिए गए लोन की राशि भी नहीं लौटाए। 30 सितंबर 2020 तक बैंक की रकम 18 लाख 65 हजार 154 रु पए हो चुकी है। जांच में ये भी तथ्य सामने आए, कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक श्रीधर एन डेकाटे और लोन स्वीकृत करने वाले सहायक प्रबंधक लखिनंद्र मंडी ने आरोपियों के केवाईसी दस्तावेज प्राप्त ही नहीं किए थे।


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