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July 27, 2026
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मध्यप्रदेश

लोकगीत सम्राट की प्रथम पुण्यतिथि पर लोगों ने किया याद

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छतरपुर / ब्यूरो

लोकगायकी के क्षेत्र में देशराज पटेरिया की पहचान लोकगीत सम्राट के रूप थी. देशराज पटेरिया ने अनेक बुंदेली लोकगीतों के जरिये मध्य प्रदेश के घर-घर में पहचान बनाई थी, प्रसिद्ध लोकगायक मध्य प्रदेश में ही नहीं विदेशों में भी अपनी गायकी का लोहा मनवा चुके थे, देशराज पटेरिया ने कड़े संघर्ष और मेहनत के बल पर ऐसा मुकाम हासिल किया था, उनकी गायकी को लोग इतना पसंद करते कि उन्हें बुंदेलखंड का तानसेन तक कहा जाने लगा। आज उनकी प्रथम पुण्यतिथि पर लोगों ने उनको भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उनको याद किया, उनके चाहने वालों के अनुसार वो एक ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने बुंदेलखंड का नाम देश प्रदेशो में नही वरण विदेशों तक मे भी रोशन किया। यहां तक कि उनके काफी चाहने वाले उनको ही लोकगीतों का जनक मानते हैं।


देशराज पटेरिया बुंदेलखंड के एक भारतीय लोक गायक थे | उन्हें देश भर में और अंतररास्ट्रीय स्तर पर बुन्देली लोक संगीत को लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया जाता है | कथित तौर पर दिल का दौरा पड़ने के बाद 5 सितंबर 2020 को 67 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।


पटैरिया का जन्म 25 जुलाई 1953 को भारतीय राज्य मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के तिंडानी में हुआ था। हाई स्कूल से स्नातक करने के बाद, उन्होंने संगीत में डिप्लोमा हासिल किया। वह स्वास्थ्य विभाग में तैनात थे और शाम की पार्टियों में गाने गाते थे।

बुंदेली चैनल पर प्रसारित साक्षात्कार

1972 में वह एक मंच कलाकार थे और उन्होंने छतरपुर आकाशवाणी केंद्र के लिए गाना शुरू किया। 1980 के दशक के दौरान, जब लोक संगीत के कैसेट बाजार में आए, तो पटैरिया एक लोक गायक बन गए।1980 में लोकगीतों की कैसेट्स भी बाजार में आ गईं जो कई बार फिल्मी गीतों पर भी भारी पड़ने लगीं।

देशराज पटैरिया का 5 सितंबर, 2020 को निधन हो गया था। कथित तौर पर उनका दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।

देशराज पटेरिया के लोकप्रिय गीत :

.उठौ धना (पत्नी) बोल रऔ मगरे पै कौआ, मोए लगत ऐसौ तोरे आ गए लिबउआ…
.चली गोरी मेला खौं साइकिल पै बैठके,जीजा जी चला रए मूंछें दोई ऐंठ के
.ई नई दुलैन सज गई है,
.एक दिन बोली नार पिया सैं कै गांव तुम्हारौ जरयारौ.. उतै पवारौ जे ढोर बछेरू हमसें न कटहै चारौ..
.किसान की लली खेत खलिहान खौं चली
.जौनों मोखों बहिन जानकी आंखन नईं दिखानी, तौनों मोखौं ई मैड़े कौ पीनें नइयां पानी
.कुल दिनन नई रै है, जौ तन माटी में मिल जै है’


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