बिजावर/संवाददाता
बिजावर मुख्य नगर पालिका अधिकारी विजय शंकर त्रिवेदी के लोकायुक्त प्रकरण के खिलाफ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एक जन हित याचिका लगाई है याचिका कर्ता सौरभ शर्मा एवं डॉ. संदीप सिंघई द्वारा हाई कोर्ट जबलपुर में गुहार लगाई गई है कि दागी अधिकारियों को कुर्सी पर बैठने का कोई अधिकार नही है क्योंकि जो अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त हो लोकायुक्त द्वारा रंगे हाथ पकड़ा गया हो वह सेवा बहाली के दौरान और अधिक भ्रष्टाचार भी कर सकता है इसलिये ऐसे अधिकारी को तत्काल निलंबित करना ही लोगों के हित में होगा।
क्या है मामला:
मुख्य नगर पालिका अधिकारी विजय शंकर त्रिवेदी टीकमगढ में पद स्थापना के दौरान बर्ष 2017 में अपने ही कार्यालय में पदस्थ भृत्य रामप्रसाद से प्रमोशन के ऐबज में रिश्वत की मांग कर रहे थे, भृत्य से लिपक बनाने के संबंध में विजय शंकर त्रिवेदी द्वारा रामप्रसाद से 1 लाख 75 हजार रुपये की मांग की गई थी जिस संबंध में भृत्य द्वारा लोकायुक्त सागर शिकायत की गई थी,डीएसपी जी.पी. वर्मा के नेतृत्व में यह कार्यवाही की गई थी। लोकायुक्त ने त्वारित कार्यवाही करते हुए सीएमओ त्रिवेदी को 25 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ धर दबोचा था। लोकायुक्त द्वारा प्रकरण पंजीबद्ध कर राज्य शासन को अभियोजन की अनुमति बावत भेजा गया लेकिन राज्य शासन द्वारा आज दिनांक तक उक्त प्रकरण में अनुमति प्रदान नही की गई, जिससे न ही सीएमओ त्रिवेदी को निलंबित किया गया और न ही कहीं अटैच किया गया। बल्कि मनचाही जगह स्थानांतरण कर दिया गया और वर्तमान में दो-दो नगर परिषदों का पदभार दे दिया गया।

याचिकाकर्ता अधिवक्ता की राय:
विजय शंकर त्रिवेदी के खिलाफ लगी जन हित याचिका की पैरवी एड. शान्तनु अयाची एवं एड. आदर्श हीरा के साथ 5 अधिवक्ताओ की टीम कर रही है, याचिकर्ता अधिवक्तागणों के अनुसार मा. उच्च न्यायालय जबलपुर से याचिका में मांग की गई है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारी जो लोकायुक्त द्वारा रंगे हाथ पकड़े जाते हैं उनको तत्काल प्रभाव से निलंबित करना चाहिए जिसके तहत विजय शंकर त्रिवेदी को भी पद मुक्त कर देना न्यायोचित होगा ताकि भविष्य में भ्रष्टाचार का कोई दूसरा कृत्य न हो सके। क्योकि ऐसे मामलों में राज्य शासन का स्वयं एक आदेश है जिसमे स्पष्ट किया गया है कि आरोपी अभियोजन की अनुमति न मिलने के फायदा उठा कर कई बार बच निकलते हैं इस कारण पूरे प्रकरण की सुनवाई दो बर्ष के अंदर पूर्ण कर दी जाए क्योंकि अभियोजन की अनुमति के लिए फ़ाइल अटकी रहती है और आरोपी की सेवा निवृत्ति हो जाती है जिससे कई बार वह साफ बच निकलता है जिससे कानून की किरकिरी होती है। ऐसा ही मामला कुछ सीएमओ बिजावर का है जिनकी सेवा निवृत्ति में मात्र कुछ ही महीने शेष हैं। हालांकि उक्त प्रकरण के बाद पकड़े गए कई अधिकारियों कर्मचारियों के प्रकरणों का फैसला भी हो चुका है और दोषी सलाखों के पीछे भी हैं किंतु इस प्रकरण में आज तक अभियोजन की अनुमति भी प्राप्त नही हुई है ऐसा क्यों, इसलिये मा.मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय से जन हित याचिका के माध्यम से अपील की गई है उक्त प्रकरण में तत्काल सीएमओ बिजावर को निलंबित करवा कर अभियोजन की अनुमति सेवा निवृत्ति के पहले देने के लिए राज्य शासन को आदेशित किया जाए ताकि अन्य भ्रष्ट अधिकारियों को एक सबक मिल सके। हालांकि मुख्य नगर पालिका अधिकारी बिजावर के खिलाफ पूर्व से भी एक सूचना के अधिकार का प्रकरण मा. उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष लंबित है जिसमे कुछ कर्मचारियों की नियुक्ति संबंधी दस्तावेज मांगे गए थे जो प्रार्थी को प्रदान नही किये गए जिसके खिलाफ एक याचिका पूर्व से भी लंबित है।


