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October 26, 2026
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बेसहारा एवं अनाथ बालकों से जुड़े समाचार के प्रकाशन में किशोर न्याय अधिनियम का पालन करें

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निजी जानकारी जिससे पहचान सिद्ध हो, को जारी करना प्रतिबंधित

समाचार-पत्रों इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया के संपादकों तथा प्रतिनिधि अधिनियम का पालन करें

छतरपुर / ब्यूरो

प्रदेश में वर्तमान में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 क्रियान्वयन है। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 में निहित प्रावधानों के तहत विधि का उल्लंघन करने वाले एवं देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद यथा संभव अनाथ, बेसहारा एवं अभ्यपर्तित बालकों से जुड़ी जानकारी समाचार-पत्र इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया में प्रचारित किए जाने वाले वीडियो में कोई ऐसी निजी जानकारी जिससे बालक की पहचान सिद्ध होती है, को प्रतिषेध (प्रतिबंधित) किया गया है।
उक्त संबंध में कलेक्टर छतरपुर शीलेन्द्र सिंह ने संचालनालय महिला एवं बाल विकास द्वारा प्रसारित पत्र के आधार पर समाचार-पत्रों इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया के संपादकों तथा अधिकृत प्रतिनिधियों से जारी किए जाने वाले समाचारों मेें अपेक्षा की है कि बालकों की देखरेख एवं संरक्षण से जुड़े किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 का पालन सुनिश्चित करेगें।
किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74(1) में कहा गया है कि किसी जांच या अन्वेषण या न्यायिक प्रक्रिया के बारे में समाचार-पत्र या पत्रिका के पृष्ठ या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (दृश्य माध्यम) या संचार के अन्य रूप में की गई किसी रिर्पोट में ऐसे नाम एवं पते, विद्यालय या अन्य विशिष्ट बातों को प्रकट नहीं किया जाएगा और न ही विधि का उल्लंघन करने वाले बालक या देखरेख और संरक्षण के जरूमंद बालक किसी बाल पीड़ित या किसी अपराध के साक्षी की जो तत्व समय प्रवृत किसी विधि के अधीन ऐसे मामले में अर्तवलित है। जिससे पहचान हो सकती है को और न ही ऐसे बालक का चित्र प्रकाशित किया जाएगा।


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