एडिटर रिपोर्ट (सौरभ शर्मा) – आज बक्सवाहा जंगल बचाने की मुहिम ओर तेज हो गई है लोगों ने अपने प्राण की आहुति देने तक का संकल्प कर लिया है यह केवल और केवल प्रकृति प्रेम और मानव जीवन की रक्षा की कोशिश है जिसमे अब लोग सारे मध्य प्रदेश से जुड़ गए है जिसमे जिले और संभाग की सरहदें भी खत्म ओ गई हैं

यही वह सुंदर जगह है जिसे बंजर कर हीरा निकाला जाना है । जिसमे तकरीबन 2 लाख 15 हजार पेड़ काटे जाने हैं । इसमें दुर्भाग्य की बात है कि जंगल तो काटा ही जाएगा उसके साथ जंगल मे रहने वाले हजारों वन्य प्राणी मोर,हिरण,नीलगाय,बंदर बहुत से पक्षी आदि अन्य जीव सभी बेघर किए जायेंगे ,साथ ही बुंदेलखंड और विंध्य पर्वत श्रृंखला की जमीन से एक सुंदर जंगल का नामो निशान मिट जाएगा।

पेड़ को पेड़ बचा रहा है तो समझ जाइए फिर कि इंसान अगर पेड़ को बचाएगा तो कितना अच्छा होगा हम बचपन से पढ़ते आ रहे हैं कि पेड़ काटने नहीं चाहिए प्राण जाए पर वृक्ष ना जाए अगर पढ़े लिखे लोग ही पेड़ कटवा डालेंगे तो फिर पढ़ाई का मतलब क्या है और अगर जन प्रतिनिधि ही जनता के जीवन की सुरक्षा ना कर सकें तो वो कैसे जन प्रतिनिधि। इसीलिए आज जनता जागरूक हो गई और कोरोना काल की आपदा को देख ये समझ गई है कि ऑक्सीजन का क्या महत्व है।

सरकार की ये कैसी नीति –
अभी हाल ही में मध्य प्रदेश के रायसेन में एक घटना सामने आई थी कि एक किसान को एक पेड़ काटने पर लगभग 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था किन्तु आज सरकार की सहमति से जब लाखों पेड़ काटे जायेंगे तो ये जुर्माना कोन भरेगा या फिर कानून में जुर्माना केवल नागरिकों को है शासकीय अमले को नहीं। क्योंकि एक पेड़ अपने जीवन में तकरीबन 12 लाख रु की ऑक्सीजन, 24 रू का प्रदूषण नियंत्रण, 19 लाख रुपए का मिट्टी संरक्षण और 4 लाख रुपए का वाटर फिलट्रेशन देता है मतलब तकरीबन 50 लाख रूपये एक पेड़ की कीमत होती है तो इन लाखों पेड़ों का जुर्माना कौन चुकाएगा। और ये वो अमूल्य संपदा है जिसकी भरपाई रुपए पैसे से नहीं हो सकती है।

