26.8 C
Madhya Pradesh
April 22, 2026
Bundeli Khabar
Home » जगद्गुरु शंकराचार्य श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी का देवलोक गमन
देश

जगद्गुरु शंकराचार्य श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी का देवलोक गमन

Bundelikhabar

सौरभ शर्मा/एडिटर   

आज सनातन धर्म प्रेमियों के लिए एक कुठाराघात करने वाली खबर सामने आई जिस पर लोग विश्वास नही कर पा रहे हैं कि जगद्गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी का सानिध्य आज सनातन धर्म अनुयायियों पर से उठ गया, आज तड़के साढ़े तीन बजे जगद्गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज देव लोक गमन कर गए जिससे समस्त धर्म प्रेमियों में शोक लहार व्याप्त हो गई, श्री महाराज जी वर्तमान में नरसिंहपुर जिले के झोतेश्वर आश्रम में चातुर्मास सम्पन्न कर रहे थे अचानक स्वास्थ खराब होने पर उपचार व्यस्था भी की गई किंतु दोपहर 3:30 बजे श्री महाराज महाप्रयाण कर गए।

एक नजर शंकराचार्य पीठाधीश्वर:
हिंदुओं को संगठित करने की भावना से आदिगुरु भगवान शंकराचार्य ने 1300 बर्ष पूर्व भारत के चारों दिशाओं में चार धार्मिक राजधानियां (गोवर्धन मठ, श्रृंगेरी मठ, द्वारका मठ एवं ज्योतिर्मठ) बनाईं | जगद्गुरु शंकराचार्य श्री स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी दो मठों (द्वारका एवं ज्योतिर्मठ) के शंकराचार्य हैं | शंकराचार्य का पद हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण है,हिंदुओं का मार्गदर्शन एवं भगवत् प्राप्ति के साधन आदि विषयों में हिंदुओं को आदेश देने के विशेष अधिकार शंकराचार्यों को प्राप्त होते हैं | सभी हिंदूओं को शंकराचार्यों के आदेशों का पालन करना चाहिये | वर्तमान युग में अंग्रेजों की कूटनीति के कारण धर्म का क्षय, जो कि हमारी शिक्षा पद्धति के दूषित होने एवं गुरुकुल परंपरा के नष्ट होने से हुआ है | हिंदूओं को संगठित कर पुनः धर्मोत्थान के लिये चारों मठों के शंकराचार्य एवं सभी वैष्णवाचार्य महाभाग सक्रिय हैं | स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती जी, सांई बाबा की पूजा करने के विरोध में हैं क्योंकि कुछ हिंदू दिशाहीन हो कर अज्ञानवश असत् की पूजा करने में लगे हुए हैं जिससे हिंदुत्व में विकृति पैदा हो रही है | स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी के अनुसार इस्कॉन भारत में आकर कृष्ण भक्ति की आड़ में धर्म परिवर्तन कर रहा है, ये अंग्रेजों की कूटनीति है कि हिंदुओं का ज्ञान ले कर हिंदुओं को ही दीक्षा दे कर अपना शिष्य बना रहे हैं | श्री स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी का 95 वां जन्मदिवस वृंदावन में बर्ष 2018 में मनाया गया एवं यहीं उनका 72वां चातुर्मास समपन्न हुआ |

आपका जीवनकाल:
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का जन्म 2 सितम्बर 1924 को मध्य प्रदेश राज्य के सिवनी जिले में जबलपुर के पास दिघोरी गांव में ब्राह्मण परिवार में पिता श्री धनपति उपाध्याय और मां श्रीमती गिरिजा देवी के यहां हुआ। माता-पिता ने इनका नाम पोथीराम उपाध्याय रखा। नौ वर्ष की उम्र में उन्होंने घर छोड़ कर धर्म यात्रायें प्रारम्भ कर दी थीं। इस दौरान वह काशी पहुंचे और यहां उन्होंने ब्रह्मलीन श्री स्वामी करपात्री महाराज वेद-वेदांग, शास्त्रों की शिक्षा ली। यह वह समय था जब भारत को अंग्रेजों से मुक्त करवाने की लड़ाई चल रही थी। जब 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा लगा तो वह भी स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े और 19 साल की उम्र में वह ‘क्रांतिकारी साधु’ के रूप में प्रसिद्ध हुए। इसी दौरान उन्होंने वाराणसी की जेल में नौ और मध्यप्रदेश की जेल में छह महीने की सजा भी काटी। वे करपात्री महाराज की राजनीतिक दल राम राज्य परिषद के अध्यक्ष भी थे। 1950 में वे दंडी संन्यासी बनाये गए और 1981 में शंकराचार्य की उपाधि मिली। 1950 में शारदा पीठ शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती से दण्ड-सन्यास की दीक्षा ली और स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती नाम से जाने जाने लगे।


Bundelikhabar

Related posts

कल सिद्धिविनायक महागणपति मंदिर के पट रहेंगे बंद

Bundeli Khabar

यूक्रेन युद्ध: कैंसल हुई फ़्लाइट के कारण प्रदेश की बेटियों की नही हो पा रही वतन वापिसी

Bundeli Khabar

गंगा नदी खतरे के निशान से 13 सेंटीमीटर नीचे

Bundeli Khabar
error: Content is protected !!