गायत्री साहू,
मुम्बई। साहित्य और सामाजिक क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने के लिए रजनी साहू ‘सुधा’ शक्ति रत्न पुरस्कर 2022 से सम्मानित हुईं हैं। उक्त पुरस्कार समारोह का आयोजन फिल्म निर्मात्री इरम फरीदी ने मुम्बई रफ्तार न्यूज़ चैनल के सीईओ शैलेश पटेल और खबर 24 के सीईओ पुष्कर ओझा के साथ मिलकर किया।
आपको बता दें कि साहित्यकार रजनी साहू ने वैसे तो रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है लेकिन समाज और साहित्य में वह तन मन धन से जुड़ी हैं। अपनी माँ की स्मृति में इन्होंने सुधा साहित्य सामाजिक संस्था का निर्माण किया है जिसका वेबसाइट भी है। इस संस्था के तहत इन्होंने साहित्य और समाज से जुड़े अनेक कार्य किये हैं। कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन की वजह से परेशान लोगों की आर्थिक कर सहायता की है। जरूरतमंद लोगों तक राशन और मेडिकल सहायता भी पहुंचाई है। रजनी प्रारंभ से ही सामाजिक और साहित्यिक कार्य अनवरत कर रही है। इनके आदिवासी इलाकों में नव चेतना शिविर, अनाथाश्रम में अनाज वितरण इत्यादि समाजोपयोगी कार्य निरन्तर चलते रहते हैं। रजनी साहू साहित्य के क्षेत्र में भी अपना योगदान देती रहती हैं। आर्ट ऑफ लिविंग के माध्यम से भी लोगों को अध्यात्म, योग और निरोगी रहना सिखाती हैं। उनकी समाज और अध्यात्म से संबद्ध कविताओं का संग्रह प्रकाशित हो चुका है। पूर्व में उनकी कविता संग्रह ‘सहस्त्र धारा’ और ‘स्वयंसिद्धा’ प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी नई कविता संग्रह ‘सत्यम शिवम् सुन्दरम’ भी प्रकाशित हो चुकी है यह ऑनलाइन अमेज़ॉन और फिल्पकार्ट जैसे स्त्रोतों पर कम कीमत में आसानी से प्राप्त हो सकती है।
रजनी साहू का मानना है कि साहित्य वही है, जो सबके हितार्थ हो। वह इस तथ्य से पूर्णतः अवगत हैं कि सरस्वती को साधना आसान नहीं है। रजनी अपनी कविताओं के द्वारा असाध्य को साधने का प्रयास करती हुई दिखती हैं। उनकी कविताओं में आत्मा के सौन्दर्य की तलाश है। वह चिड़ियों की चहचहाहट में, गुड्डे – गुड़ियों की शरारतों और तितलियों के पंखों में खुशी का अवगाहन करती हुई दिखायी देती हैं। अनन्त की तलाश में ‘सत्यम् शिवम् सुन्दरम्’ की कवयित्री स्वयं भी अनन्त हो जाना चाहती हैं। उनका मानना है कि माटी की यह देह तो विदीर्ण हो जाएगी, किन्तु तत्त्व रूप में वह अनश्वर हैं। रजनी ने अपनी कविताओं के बहाने जीवन के विभिन्न पहलुओं को छुआ है। वह अपनी उम्र के बीते क्षणों को लेकर बहुत ही भावुक हैं और जीवन के समस्त तत्त्वों में स्वयं समाहित हो जाना चाहती हैं। वह अधिकतर मुक्त छन्द में अपनी बात कविता के द्वारा संप्रेषितः करती है, किन्तु छन्द में कहने का लोभ वे संवरण नहीं कर पाती है।
भाषा सहोदरी के अंतरराष्ट्रीय अधिवेशन में इनकी सहभागिता रही। रजनी साहू विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित भी हुई हैं। उन्हें उद्दीप्त प्रकाशन द्वारा काव्य – साधक पुरस्कार, बस्तर पाति समूह में कविताओं के लिए तृतीय पुरस्कार, लोककला एवं साहित्य संस्था सिरजन द्वारा सम्मान, विश्व सरयू मंच द्वारा सम्मान, कविता की पाठशाला और मराठी कविता की बाल साहित्य की पुस्तक में रेखाचित्र के लिए सम्मान प्राप्त हुआ है। उन्होंने यूरोप की साहित्यिक यात्रा और सम्मान प्राप्त किया है। कवि सम्मेलनों का भव्य आयोजन और हिन्दी भाषा की स्वरचित बाल कविता का आयोजन एवं सम्पादन भी रजनी साहू ने किया है।

