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May 1, 2026
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जानिए क्या है मोक्षदा एकादशी व्रत एवं गीता जयंती

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हर माह की 11वीं तिथि एकादशी होती है.एकादशी का दिन भगवान श्री विष्णु जी को समर्पित है. इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा-अर्चना और व्रत किए जाते हैं.इस दिन व्रत रखने से पापों की मुक्ति होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. साथ ही, मृत्यु के बाद सद्गति प्राप्त होती है .इस बार 14 दिसंबर, मंगलवार के दिन मोक्षदा एकादशी पड़ रही है.

मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती एक ही दिन पड़ती है। *इस दिन भगवान कृष्ण ने महाभारत में अर्जुन को भगवद गीता का उपदेश दिया था।मोक्षदा *एकादशी की तुलना मणि चिंतामणि से की जाती है, जिसको करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।*

इस एकादशी का व्रत यदि भक्ति भाव से किया जाए, तो पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. एकादशी का व्रत दशमी के सूर्यास्त के बाद से शुरू होकर द्वादशी के दिन हरि वासर के बाद समाप्त होता है.

एकादशी कब है ❓जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि 👇*

👉 एकादशी तिथि शुरुआत 👇

13 दिसंबर 2021, सोमवार रात्रि 09:32 मिनट से

👉 एकादशी तिथि समापन 👇

14 दिसंबर 2021, मंगलवार रात्रि 11=35 तक

👉 एकादशी तिथि पारण👇
15 दिसंबर 2021,बुधवार सुबह 07:02 से 9=50 तक

*विशेष :
एकादशी का व्रत सूर्योदय तिथि 14 दिसंबर 2021 मंगलवार को ही रखें

{ सोमवार शाम को एवं मंगलवार व्रत के दिन खाने में चावल का प्रयोग बिल्कुल भी ना करें भले ही आप ने व्रत ना भी रखा हो🙏}*

एकादशी तिथि के लिए सूर्य उदय तिथि मान्य होती है इसलिए * मोक्षदा एकादशी का व्रत 14 दिसंबर 2021 मंगलवार को रखा जाएगा* ।

गीता जयंती महोत्सव
1 दिसंबर से 31 दिसंबर 2021 तक है ।

गीता जयंती हिन्दुओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है इस दिन हिन्दुओं के पवित्र ग्रंथ भगवद् गीता का जन्म हुआ था अर्थात् गीता जयंती वह दिन है जब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता सुनाई थी। यह हिंदू कैलेंडर के मार्गशीर्ष महीने के 11 वें दिन शुक्ल एकादशी को मनाया जाता है। भगवद् गीता का वर्णन स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्ध प्रारंभ होने से पहले किया था। ऐसा विश्वास है कि महाभारत में पांडव और कौरवों के बीच हर सम्भव सुलह के प्रयास के बाद अन्याय, और अधर्म के विरुद्ध धर्म ,सत्य , न्याय और नारी शक्ति की रक्षा के लिए युद्ध होना निश्चत हो गया ।

कुरुक्षेत्र के युद्ध के मैदान में कृष्ण द्वारा स्वयं अर्जुन को ‘भगवद गीता’ प्रकट की गई थी। अब यह स्थान भारत के राज्य हरियाणा में कुरुक्षेत्र के नाम से है। कुरुक्षेत्र हिन्दुओं का पवित्र व मुख्य धार्मिक स्थल है। , क्योंकि गीता की ज्ञानगंगा भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के मध्य बह रही थी । संजय को उनके गुरु वेद व्यास द्वारा आशीर्वाद व शक्ति प्रदान कि गई थी, कि वह युद्ध के मैदान में होने वाली घटनाओं को दूर से ही देख सकता है।

गीता जयंती को एक त्योहार के रूप में मनाया जाता है। भगवान कृष्ण के सभी भक्तों (सनातन धर्म के अनुयायियों) द्वारा दुनिया भर में गीता जयंती का त्योहार मनाया जाता है। गीता में लगभग 700 श्लोक है जो सभी मनुष्यों को जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं कर्मयोग, ज्ञान योग और भक्ति योग के बारे ज्ञान प्रदान करते हैं। जो मानसिक परेशानियां ,अवसाद , तनाव, विषाद को खत्म करके, आत्म संतोष और शांति के साथ आध्यात्मिक रूप से प्रगति करना चाहते हैं वह जीवन जीने की कला सीखने के लिए गीता का अध्ययन करते है।

इस दिन गीता पर प्रवचन, भजनों का आयोजन होता है। जिन जगहों पर यह त्यौहार भव्य रूप से मनाया जाता है, वहां बच्चों को गीता पढ़ने के लिए उनकी रुचि को प्रोत्साहित करने के तरीके के रूप में दिखाने के लिए स्टेज प्ले और गीता जप प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। गीता के सार वाले पत्रक, पुस्तिकाएं और पुस्तकें जनता को वितरित की जाती हैं। इस पवित्र दिन पर गीता की मुफ्त प्रतियां वितरित करना विशेष रूप से शुभ है।


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