29.9 C
Madhya Pradesh
October 1, 2026
Bundeli Khabar
images 4 3
मध्यप्रदेश

ब्लैक फंगस का इलाज अब जबलपुर में…बनेंगे इंजेक्शन..

Bundelikhabar

जबलपुर- कोरोना के बाद ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों और इलाज के लिए जरूरी एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन की मारामारी के बीच राहत की खबर है। जबलपुर की रेवा क्योर लाइफ साइंसेज दवा कंपनी अब इसके इंजेक्शन बनाएगी। कंपनी को सरकार की तरफ से उत्पादन संबंधी लाइसेंस मिल गया है। इंदौर की मॉडर्न लैबोरेटरी के बाद प्रदेश की यह दूसरी कंपनी है, जिसे इसकी अनुमति मिली है। जून तक कंपनी इंजेक्शन बनाने की तैयारी में है। यह कंपनी इंजेक्शन और पाउडर दोनों तरह का उत्पादन करेगी।ब्लैक, व्हाइट, क्रीम सहित अन्य सभी फंगस के होने पर इंजेक्शन की कमी नहीं होगी। प्रदेश सरकार ने कोविड के बाद इसे भी महामारी घोषित की है। जबलपुर में २०० से अधिक मरीज सामने आ चुके हैं। महाकौशल और विध्य के १८ जिलों से मरीज जबलपुर मेडीकल कॉलेज में इलाज कराने आ रहे हैं। अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं २८ इलाज के बाद ठीक होकर घर जा चुके हैं। इस बीमारी के इलाज में सबसे बड़ी बाधा इसके इंजेक्शन की कमी को बताया जा रहा है। सरकारी स्तर पर इसकी खरीदी कर मेडिकल कॉलेज को इंजेक्शन उपलब्ध कराया जा रह है उमरिया-डुंगरिया स्थित रेवा क्योर लाइफ साइंसेज कंपनी के एमडी रवि सक्सेना के मुताबिक ब्लैक फंगस के बढ़ते मामले और इसके इंजेक्शन की देश में भारी कमी को देखते हुए उन्होंने इमरजेंसी में इसके उत्पादन का निर्णय लिया। उनकी कंपनी एंटी कैंसर इंजेक्शन बनाती है। देश की कई बड़ी व नामी कंपनियों से उनका टाइअप है। प्रदेश सरकार से लाइसेंस मिलने के बाद वह रॉ-मटैरियल की व्यवस्था में जुटे हैं। कुछ कंपनियों से उनकी डील हो चुकी है। १० जून तक उन्हें रॉ-मटैरियल मिलने की उम्मीद है। इसके बाद वह इंजेक्शन बनाना शुरू करेंगे।जिला क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक में पिछले दिनों मध्यप्रदेश नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र जामदार इस कंपनी के आवेदन पर जल्द निर्णय लेने का अनुरोध प्रदेश सरकार से किया था। ब्लैक फंगस के इलाज में इससे बड़ी राहत मिलेगी। डॉक्टर जामदार ने बताया कि जबलपुर में ब्लैक फंगस इंजेक्शन का उत्पादन मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।
फंगस के लिए एम्फोटेरिसिन-बी का इंजेक्शन जरूरी,
फंगस से पीड़ित मरीजों के लिए एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन ७० से ८० एमएल रोज लगाने पड़ते हैं। एक मरीज को ३० से ४० इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। एक वायल ५० एमएल का होता है। जबलपुर मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में पदस्थ डॉक्टर सौम्या सैनी के मुताबिक मरीजों के इलाज में इस इंजेक्शन का कोई विकल्प नहीं है। जबलपुर में इसके तैयार होने से इस क्षेत्र के मरीजों को राहत मिलेगी।

images 4 3

Bundelikhabar

Related posts

सुदामा मिलन के पश्चात पुष्प होली के साथ सम्पूर्ण हुई श्रीमद्भागवत कथा

Bundeli Khabar

तीन घंटे का जाम:शासन की मनमानी से निजी मोटर मालिक परेशान

Bundeli Khabar

अनशनकारी पार्षद रामपाल शर्मा का स्वास्थ्य बिगड़ा, अस्पताल में भर्ती

Bundeli Khabar
error: Content is protected !!