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October 28, 2026
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मनोरंजन

दिल्ली और मुंबई के मुख्य सिनेमाघरों में नहीं लगाई जा रही फिल्म ‘द कन्वर्जन’

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गायत्री साहू,

पैसे लेने के बाद भी पैनोरमा डिस्ट्रीब्यूटर सिनेमाघरों में नहीं दिखा रही फिल्म ‘द कन्वर्जन’

मुम्बई। फ़िल्म ‘द कन्वर्जन’ के निर्देशक विनोद तिवारी का आरोप है कि उनकी फिल्मों को स्क्रीन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। पैनोरमा डिस्ट्रीब्यूशन को पैसे देने के बाद भी डिस्ट्रीब्यूशन भारी लापरवाही बरत रहा है और फ़िल्म के लिए स्क्रीन और सिनेमा हॉल मुहैया नहीं करा रहा। ‘द कन्वर्जन’ फ़िल्म एक अनदेखी साजिश का शिकार बन गया है। कुछ बड़े फिल्मी ग्रुप और कुछ हिंदुत्व विरोधी संगठन इस फ़िल्म को दर्शकों तक पहुंचने से रोकना चाहते हैं। ‘द कश्मीर फाइल्स’ की भांति फ़िल्म को प्रसिद्धि और गति प्राप्त ना हो इसलिए इसे थिएटर तक ही पहुंचने नहीं दिया जा रहा है।

‘द कन्वर्जन’ एक ज्वलंत मुद्दे लव जिहाद पर बनी फिल्म है। इस फ़िल्म के माध्यम से दिखया गया है कि कैसे एक विशेष सम्प्रदाय के लोग प्रेम का पाखंड बिछाकर हिन्दुधर्म की बेटियों को फंसा रहे हैं। बाद में उनका धर्मांतरण कर उन बेटियां को जीवन भर भटकने के लिए छोड़ दिया जाता है और उनके विरोध करने पर उन्हें मार भी दिया जाता है। यह आधुनिक समय की सबसे बड़ी सच्चाई और हिन्दू लड़कियों के प्रति सबसे बड़ी साजिश है। फ़िल्म के निर्देशक विनोद तिवारी का कहना है कि अच्छी और समाज को आईना दिखाने वाली प्रेरक फिल्मों को एक साजिश के तहत दर्शकों तक पहुंचने से रोका जा रहा है। जानबूझकर फ़िल्म को स्क्रीन और थिएटर नहीं दिए जा रहे।

कई सिनेमाघरों में फ़िल्म की एडवांस बुकिंग भी की गई थी फिर भी बुकिंग प्रक्रिया रोक दिया गया और स्क्रीन नहीं दी गयी। पैनोरमा डिस्ट्रीब्यूशन को प्रोडक्शन द्वारा पैसे दिए जा चुके हैं और फ़िल्म को थिएटर दिलाने के बारे में पूछे जाने पर पैनोरमा डिस्ट्रीब्यूशन उचित जवाब भी नहीं दे रहा। पैनोरमा के अधिकारियों का कहना है कि जहाँ फ़िल्म की थिएटर दिलाये जाते हैं वहाँ पुलिस प्रशासन आकर फ़िल्म पर रोक लगा देती है।

‘द कन्वर्जन’ फ़िल्म में एक विशेष धर्म का घिनौना चेहरा दिखाने की कोशिश की है जिससे कुछ हिंदू विरोधी संगठन खुश नहीं है। फ़िल्म पर रोक के पीछे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से उनकी भागीदारी है और कुछ बड़े ग्रुप भी उनका सहयोग कर रहे हैं। इन सभी से फ़िल्म को नुकसान हो रहा है। एक समाजप्रेरक जागरूक फ़िल्म बनकर भी यह लोगों के मध्य नहीं आ पा रही और शुरू से ही एक साजिश का शिकार हो रही है। फ़िल्म रिलीज से पहले ही फ़िल्म को दर्शकों का प्यार मिलना शुरू हो गया था। दर्शक ही फ़िल्म का प्रचार कर रहे थे लेकिन साजिशों की आंधी में फ़िल्म को दर्शकों के मध्य आने के लिए काफी जद्दोजहद करना पड़ रहा है। यह एक चिंता और निराशा का विषय है। फ़िल्म आईबीएम रेटिंग में भी आगे है लेकिन इसका पैर पकड़ रेस जीतने से रोका जा रहा है।


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