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April 23, 2026
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खजुराहो: आगंतुक पर्यटक केंद्र का आरंभ, रॉयल गार्डेन्स होंगे पुनर्जीवित

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छतरपुर/प्रशांत गोस्वामी
मध्य प्रदेश में स्थित एक छोटा-सा ऐतिहासिक नगर खजुराहो दुनिया भर में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में जाना जाता है, जो प्राचीन भारतीय सभ्यता की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और नवोन्मेषी स्थापत्यकला के चमत्कार का एक साकार रूप है। इसी तरह बुंदेलखंड में उससे कम पुरानी, मुग़लकालीन भारतीय संस्कृति की एक समृद्ध विरासत भी पाई जाती है, जिनमें महल, मंदिर, बावओलियाँ, और बाग़ीचे शामिल हैं.। इंडियन ट्रस्ट फ़ॉर रूरल हेरिटेज एंड डेवेलपमेंट (आईटीआरएचडी) के बेल्जियन चैप्टर ने परंपरागत स्थापत्य और ऐतिहासिक लैंडस्केप में विशेषज्ञता रखने वाले एक डिज़ाइन स्टूडियो धरातल और पटेरिया परिवार के साथ सहकार स्थापित किया है, ताकि खजुराहो के पास स्थित राजनगर में 18वीं सदी के रॉयल गार्डेन्स को पुनर्स्थापित किया जा सके, जिन्हें खजुराहो के खोए हुए बाग़ कहा जाता था.।

राजनगर के रॉयल गार्डेन्स में ‘आगंतुपर्यटक केंद्र’ (विज़िटर्स सेंटर) का उद्घाटन समारोह इस दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिसका आयोजन 30 अप्रैल 2022 को शाम 5 बजे पटेरिया का बाग़, राजनगर, मध्य प्रदेश में किया गया। खजुराहो शहर से केवल 4 कि मी दूर स्थित राजनगर के रॉयल गार्डेन्स 18वीं सदी के राजसी बाग़ हैं। इन 15 राजसी बाग़ों की यादें सार्वजनिक स्मृतियों से लुप्त हो गई थीं और 1998 तक वे खंडहर बन चुकी थीं , खजुराहो योजना समिति इंडियन ट्रस्ट फ़ॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज ने खजुराहो क्षेत्र के लिए एक सर्वांगीण विकास रिपोर्ट तैयार की। राजनगर में स्थित ये सभी बाग़ 3 से 6 एकड़ क्षेत्र के हैं, जिनमें एक छोटा शिव मंदिर, एक कोठी, समाधि और कई बावओलियाँ और सिंचाई के नहर स्थित हैं.।

धरातल को 2016 में आईटीआरएचडी बेल्जियम ने आगंतुकपर्यटक केंद्र के डिज़ाइन का ज़िम्मा सौंपा, जिसके तहत शिव मंदिर के पास स्थित खंडहर बन चुकी एक छोटी कोठी को पुनर्स्थापित करना और बाग़ीचों का जीर्णोद्धार किया गया।
केंद्र की बनावट में 18वीं और 19वीं शताब्दी की बुंदेली स्थापत्य कला के विभिन्न तत्वों को शामिल किया गया है.। कोठी में एक झरोखा (बालकनी) बनाया है। दीवार में छत के स्तर पर बनाया गया यह सजावटी झरोखा पुरानी इमारत के मूल झरोखे से प्रेरित है.। इसके अलावा, एक सीढ़ीघर भी जोड़ा गया है, जिसकी प्रेरणा बावओली से ली गई है, जो बुंदेली बाग़ीचों में आमतौर पर पाई जाती है.। यह सीढ़ीघर बाग़ीचे में आने वाले आगंतुकोंपर्यटकों के लिए प्रकाश और छाया का एक बेहतरीन नज़ारा पेश करता है.।

गेर्त रोबेरेख्तग्रीट रॉबरेष्ट्स , संयोजक, आईटीआरएचडी बेल्जियम, ने जानकारी देते हुए बताया कि स्थानीय भागीदारों के साथ ऐसे खोए हुए विरासत स्थलों की पुनर्स्थापना सांस्कृतिक संरक्षण के लिए और साझे संसाधनों के सामुदायिक स्वामित्व की प्ररेणा के लिए महत्वपूर्ण है.। पुनर्स्थापना से आगे बढ़ कर, इस परियोजना में परिकल्पना की गई है कि ये बाग़ीचे क्षेत्र में सांस्कृतिक संपदा और टिकाऊ विकास के केंद्रों के रूप में उभरेंगे। धरातल के संस्थापक श्री निशांत उपाध्याय कहते हैं, “चूँकि ये उपज देने वाले बाग़ीचे हैं, इसलिए परियोजना का सबसे अहम हिस्सा नई पीढ़ी के बीच में आजीविका के टिकाऊ उपायों के रूप में जैविक खेती को बढ़ावा देना और उन्हें बुंदेली संस्कृति के बारे में सिखाना है.।”

सब्ज़ियों और फलों की स्थानीय क़िस्मों का एक सामुदायिक बीज बैंक बनाने; और नई पीढ़ी द्वारा इन क़िस्मों की खेती क्षेत्र में कृषि-उद्यमिता को प्रोत्साहित करेगी.। इस तरह, यह केंद्र स्थानीय लोगों के लिए जैविक खेती के प्रशिक्षण के लिए एक जगह की भूमिका निभाएगा, साथ ही यह स्थानीय त्योहारों और रिवाजों के लिए सामुदायिक केंद्र का काम भी करेगा।


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