24.8 C
Madhya Pradesh
August 15, 2026
Bundeli Khabar
IMG 20220423 WA00003
धर्म

शनिदेव का एकमात्र मंदिर जहाँ दोनों पत्नियों के साथ होती है उनकी पूजा

Bundelikhabar

विश्व में शनि तीर्थ तमिलनाडु शनि देव का 700 वर्ष पुराना मंदिर, यहां दोनों पत्नियों मंदा व ज्येष्ठा के साथ होती उनकी पूजा
पंकज पाराशर छतरपुर

भारत में तमिलनाडु के पेरावोरानी के पास तंजावूर के विलनकुलम में अक्षयपुरीश्वर मंदिर है। ये मंदिर भगवान शनि के पैर टूटने की घटना से जुड़ा हुआ है। इस मंदिर में शारीरिक रुप से परेशान और साढ़ेसाती में पैदा हुए लोग शनिदेव की विशेष पूजा के लिए आते हैं। यहां के प्रमुख भगवान शिव अक्षयपुरीश्वर और देवी पार्वती अभिवृद्धि नायकी के रूप में है। इनके साथ ही शनिदेव की पूजा उनकी पत्नियों के साथ की जाती है।

IMG 20220423 WA00004

पत्नियों के साथ होती शनि देव की पूजा
यहां शनिदेव की पूजा उनकी दोनों पत्नियों मंदा और ज्येष्ठा के साथ की जाती है। इन्हें यहां आदी बृहत शनेश्वर कहा जाता है। यहां साढ़ेसाती, ढय्या और शनि दोष से परेशान लोग पूजा करने आते हैं। इनके अलावा शारीरिक रूप से परेशान और वैवाहिक जीवन में दुखी लोग यहां विशेष पूजा और अनुष्ठान करवाते हैं। शनिदेव अंक 8 के स्वामी भी हैं इसलिए यहां 8 बार 8 वस्तुओं के साथ पूजा करके बांए से दाई ओर 8 बार परिक्रमा भी की जाती है।

शनिदेव को मिला विवाह और पैर ठीक होने का आशीर्वाद
पौराणिक कथा के अनुसार यहां पहले बहुत सारे बिल्व वृक्ष थे। तमिल शब्द विलम का अर्थ बिल्व होता है और कुलम का अर्थ झूंड होता है। यानी यहां बहुत सारे बिल्ववृक्ष होने से इस स्थान का नाम विलमकूलम पड़ा। यहां बहुत सारे बिल्व वृक्ष होने से उनकी जड़ों में शनिदेव का पैर उलझ गया और वो यहां गिर गए थे। जिससे उनके पैर में चोट आई और वो पंगु हो गए। अपने इस रोग को दूर करने के लिए उन्होंने यहां भगवान शिव की पूजा की। शिवजी ने प्रकट होकर उन्हें विवाह और पैर ठीक होने का आशीर्वाद दिया। तब से इन परेशानियों से जुड़े लोग यहां विशेष पूजा करवाते हैं।

करीब 700 साल पुराना है मंदिर
तमिलनाडु के विलनकुलम में बना अक्षयपुरीश्वर मंदिर तमिल वास्तुकला के अनुसार बना है। माना जाता है कि इसे चोल शासक पराक्र पंड्यान द्वारा बनवाया गया है। जो 1335 ईस्वी से 1365 ईस्वी के बीच बना है। करीब 700 साल पुराने इस मंदिर के प्रमुख देवता भगवान शिव हैं। उन्हें श्री अक्षयपुरीश्वर कहा जाता है। उनके साथ उनकी शक्ति यानी देवी पार्वती की पूजा श्री अभिवृद्धि नायकी के रूप में की जाती है।

मंदिर की बनावट
मंदिर की आयताकार बाउंड्री दीवारों से बनी हैं। मंदिर प्रांगण विशाल है और यहां कई छोटे मंडप और हॉल बने हुए हैं। मंदिर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भीतरी मंडप है जो बड़े पैमाने पर दीवारों से घिरा हुआ है। यहां कोटरीनुमा स्थान हैं जहां सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंच पाता है। इस देवालय के बीच में गर्भगृह बना हुआ है। जहां भगवान शिव अक्षयपुरिश्वर के रूप में विराजमान हैं। यहां पत्थर का एक बड़ा शिवलिंग है। मंदिर के पुजारी ही इस गर्भगृह में प्रवेश कर सकते हैं।


Bundelikhabar

Related posts

जानिए क्या है मोक्षदा एकादशी व्रत एवं गीता जयंती

Bundeli Khabar

कैसी होगी आपकी राशि पर मकर संक्रांति: राशिफल

Bundeli Khabar

17 लाख बर्ष प्राचीन हनुमान मंदिर जहाँ आये थे स्वयं भगवान राम

Bundeli Khabar
error: Content is protected !!