26.6 C
Madhya Pradesh
September 27, 2026
Bundeli Khabar
IMG 20210912 223510
मध्यप्रदेश

पाटन:लाडू अर्पण कर मनाया निर्वाणोत्सव

Bundelikhabar

पाटन/संवाददाता

दीपों का त्योहार दीपावली बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह त्योहार आपनी अपनी धार्मिक परम्पराओं के अनुसार मनाया जा रहा है। इसी श्रखला में गुरूवार सुबह जैन परम्परानुसार मंदिरों में जैन श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया। शहर के सभी जैन मंदिरों में श्रद्धालुओं ने वर्तमान जिन भगवान महावीर की बड़े ही श्रद्धा भक्ति भाव से अभिषेक पूजन विधान कर धर्मलाभ प्राप्त कर भगवान का निर्वाणोत्सव मनाया। श्री शांतिनाथ भगवान जिनालय में सुबह से ही पूजा अर्चना कर भगवान का अभिषेक किया गया तत्पश्चात लाडू अर्पण किये गए। आज के दिन वर्तमान जिन शासन नायक भगवान महावीर को केवलज्ञान प्राप्त हुआ था और वह केवलज्ञान प्राप्त कर मोक्ष गए थे। इसलिए उनका मोक्ष कल्याणक मनाया जाता है ।

IMG 20211104 WA0011

डॉ. संदीप सिंघई, आज़ाद जैन,अशोक संधेलिया, शानू बजाज, चेतन सिंघई, अखिलेश जैन, संजय जैन,रोहित सिंघई, सजल सिंघई आदि लोगों के साथ मिलकर महिला मंडल अभिलाषा जैन, सीमा जैन, शिरोमणि सिंघई, श्रद्धा जैन, जयश्री जैन, आदि लोगों ने मिलकर निर्वाणोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया।

IMG 20211104 WA0017

निर्वाणोत्सव का महत्व:
जैन समाज द्वारा दीपावली, महावीर स्वामी के निर्वाण दिवस के रूप में मनाई जाती है।जैन ग्रथों के अनुसार महावीर स्वामी (वर्तमान अवसर्पिणी काल के अंतिम तीर्थंकर) को चर्तुदशी के प्रत्युष काल में मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। चर्तुदशी का अन्तिम पहर होता है इसलिए जैन लोग दीपावली अमावस्या को मनाते है। संध्या काल में तीर्थंकर महावीर के प्रथम शिष्य गौतम गणधर को केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। अतः अन्य सम्प्रदायों से जैन दीपावली की पूजन विधि पूर्णतः भिन्न है।

IMG 20211104 WA0020

कैसे मनाते हैं निर्वाणोत्सव:
इस दिन, कई जैन मंदिरों में निर्वाण लाडू चढ़ाया जाता है। लड्डू गोल होता है, जिसका अर्थ होता है जिसका न आरंभ है न अंत है। अखंड लड्डू की तरह आत्मा होती है, जिसका न आरंभ होता है और न ही अंत। लड्डू बनाते समय बूँदी को कड़ाही में तपना पड़ता है और तपने के बाद उन्हें चाशनी में डाला जाता है। उसी प्रकार अखंड आत्मा को भी तपश्चरण की आग में तपना पड़ता है तभी मोक्षरूपी चाशनी की मधुरता मिलती है।

IMG 20211104 WA0018

जैन धर्म मे लक्ष्मी का अर्थ:
जैन धर्म में लक्ष्मी का अर्थ होता है निर्वाण और सरस्वती का अर्थ होता है केवलज्ञान, इसलिए प्रातःकाल जैन मंदिरों में भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण उत्सव मनाते समय भगवान की पूजा में लड्डू चढ़ाए जाते हैं।भगवान महावीर को मोक्ष लक्ष्मी की प्राप्ति हुई और गणधर गौतम स्वामीजी को केवलज्ञान रूपी सरस्वती प्राप्त हुई, इसलिए लक्ष्मी-सरस्वती का पूजन दीपावली के दिन किया जाता है। लक्ष्मी पूजा के नाम पर रुपए-पैसों की पूजा जैन धर्म में स्वीकृत नहीं है।


Bundelikhabar

Related posts

थाना प्रभारी आत्महत्या मामले में आशी राजा और सोनू परमार एक दिन की पुलिस रिमांड पर

Bundeli Khabar

जिला दंडाधिकारी ने की दो अपराधियों पर एनएसए की कार्यवाही

Bundeli Khabar

आशा व साथिया के प्रोत्साहन हेतु साथिया सिनेमा कार्यक्रम का आयोजन

Bundeli Khabar
error: Content is protected !!